True Friendship Story in Hindi | सच्ची दोस्ती की कहानी

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True Friendship Story in Hindi
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1. True Friendship Story in Hindi – सच्ची दोस्ती की कहानी

True Friendship Story in Hindi: एक बार की बात है। गांव में एक तालाब था। उस तालाब में एक कछुआ रहता था। उस तालाब के नज़दीक पेड़ पर एक कौआ रहता था। वही पास के एक जंगल में एक हिरण भी रहता था। उनमें आपस में बहुत सच्ची दोस्ती थी। वह सब शाम के समय मिलते थे।

एक दिन तालाब में मछुआरा आया। उसने तालाब में जाल फेंका। उस जाल में कोई मछली तो नहीं फसी उसमे वह कछुआ फ़स गया। मछुआरा उस कछुए को रस्सी के सहारे अपने डंडे से बांध कर अपने घर जाने के लिए निकल पड़ा।

जब कौए और हिरण ने अपने दोस्त कछुए को मछुआरे की कैद में पाया तो उन्होंने उसे छुड़ाने की सोची। हिरण मछुआरे के रास्ते में कुछ आगे जाकर लेट गया। जब मछुआरा हिरण के पास पहुँचा तो उसने हिरण को देखा। मछुआरे ने सोचा वह हिरण मरा हुआ है। उस हिरण की खाल को वह ऊंचे दामों में बेच सकता है।

उसे लेजाने के लिए मछुआरे को रस्सी की आवशयकता थी। लेकिन रस्सी में उसने पहले से ही कछुए को बांध रखा था। इसलिए मछुआरे ने कछुए को रस्सी से खोल दिया। रस्सी से खोलने के बाद कछुआ बड़ी आराम से वहाँ से निकल गया। मछुआरा जैसे ही हिरण को बांधने के लिए उसकी तरफ बढ़ा।

तभी कौए ने काँव काँव की आवाज़ की। वह इशारा सुनकर हिरण उठकर वहाँ से भाग गया। इस तरफ हिरण और कौए ने अपनी सच्ची दोस्ती का परिचय देते हुए अपने दोस्त कछुए की जान बचाई।

True Friendship Story in Hindi

2. True Friendship Story in Hindi

एक बार की बात है राम और मोहन नाम के दो सच्चे दोस्त थे। उनकी पक्की दोस्ती की चर्चा हर जगह मशहूर थी। वह एक दूसरे के लिए जान देने के लिए भी तैयार थे। एक दिन राम को राजा के सैनिकों ने ग़लती से किसी चोरी के आरोप में पकड़ लिया।

राम को जब राजा के दरबार में पेश किया गया तो राम ने अपनी बेगुनाही के बारे में राजा से कहा लेकिन राजा मानने को तैयार नहीं थे। उन्होंने राम को फांसी की सजा सुनाई। जब मोहन की इस बात का पता लगा तो वह भी दरबार में पहुंच गया। लेकिन राजा राम को सज़ा सुना चुके थे।

राजा ने राम से अपनी किसी भी आखिरी इच्छा बताने के लिए कहा। राम ने सज़ा से पहले अपने परिवार से मिलकर आने की इच्छा जताई। राजा ने कहा की तुम्हारा क्या भरोसा है की तुम अपने परिवार से मिलकर वापस आ जाओगे। इस पर राम के दोस्त मोहन ने राजा से कहा की जब तक मेरा मित्र अपने परिवार से मिलकर नहीं आता तब तक आप मुझको उसकी जगह बंदी बना लीजिये।

यदि मेरा मित्र लौट कर नहीं आया तो राम की जगह मै फांसी पर लटकने के लिए तैयार हूँ। मोहन की यह बात सुनकर राजा और बाकी दरबार अचंभित हुआ। लेकिन उन्होंने मोहन की बात मानकर राम को परिवार से मिलने जाने दिया और मोहन को बंदी बना लिया।

राजा ने राम को अपने परिवार से मिलकर आने के लिए एक दिन का समय दिया। राम अपने परिवार से मिलकर वापस घोड़े में राजा के पास आने लगा। लेकिन रास्ते में उसका घोड़ा घायल हो गया। जिसके कारण वह पैदल ही निकल पड़ा। उसको अपने दोस्त की जान की चिंता थी। राम उस दिन राजा के दरबार में नहीं पहुँच पाया।

अगले दिन सुबह मोहन को राम की जगह फांसी पर लटकाने की तैयारी शुरू हो गयी। जैसे ही मोहन को फांसी पर लटकाने वाले थे। तभी राम वहाँ पहुँच गया। मोहन ने राम को वहाँ से जाने के लिए कहा और कहा की मै फांसी पर लटकूँगा।

राम ने मोहन को मना किया और कहा की मै अब आ चूका हूँ। मै ही फांसी पर लटकूँगा। उन दोनों की बात सुनकर राजा को उनकी पक्की दोस्ती का अंदाजा लगा। राजा ने उन दोनों की सच्ची दोस्ती देखते हुए उन दोनों को रिहा कर दिया।

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