होशियार मुखिया की कहानी हिंदी में | Clever village chief moral story in hindi

होशियार मुखिया की कहानी हिंदी में  Clever village chief moral story in hindi
होशियार मुखिया की कहानी हिंदी में Clever village chief moral story in hindi

होशियार मुखिया की कहानी हिंदी में | Clever village chief moral story in hindi

होशियार मुखिया कहानी हिंदी में | Clever village chief moral story in hindi: एक समय की बात है रामपुर गांव में हरीश नाम का एक दूधिया रहता था। गांव के सभी व्यक्तियों को वही दूध देता था। कोई भी दूधिया बाहर से उस गांव में नहीं आता था क्योंकि उस गांव में आने के लिए एक नदी को पार करना पड़ता था।

हरीश ने गांव में ही 3 गाय लेकर अपनी डेयरी खोल रखी थी जिससे वह पुरे गांव में दूध सप्लाई करता था। अकेला दूधिया होने के कारण वह गांव में बहुत मनमानी करता था और कभी भी दूध के दाम को बढ़ा देता था। एक दिन वह एक महिला को दूध देने गया तो उसने उस महिला को बोला कल से दूध 35 रूपए किलो हो गया है।

महिला ने अभी कुछ दिन पहले तो तुमने दूध 25 से 30 रूपए किलो किया था। उसने महिला से बोला यदि तुमको दूध चाहिए तो बताओ नहीं तो कल से मत लेना। उसके इस दूध के बढे हुए दाम से परेशान होकर कुछ लोग मिलकर गांव के मुखिया के पास गए।

उनने मुखिया से बोला की हरीश दूधिया अपनी मर्जी से बार बार दूध के दाम बढ़ा रहा है और इसके अलावा उसका दूध भी पानी की तरह पतला होता जा रहा है।

होशियार मुखिया की कहानी हिंदी में | Clever village chief moral story in hindi

गांव के मुखिया ने लोगों की समस्या को सुना और इसका हल निकालने के लिए कहा। मुखिया ने गांव के जमाकोश में अपने मुनीम को रूपए चेक करने को कहा।

मुनीम ने बताया उसमे 10000 रूपए है। मुखिया अपने मुनीम के साथ गौशाला गया गाय को देखने के लिए। वहाँ जाकर मुखिया ने गाय का दाम पूछा एक गाय का दाम गाय बेचने वाले व्यक्ति ने 1000 रूपए बताया। गाय के बारे में जानकर मुखिया को पता चला की एक गाय 30 किलो दूध देती है जो की उनके गांव के लिए सही है।

उसने अपने मुनीम से पूछा हरीश दूधिये के पास कितनी गाय है मुनीम ने बताया उसके पास केवल 3 गाय है। मुखिया ने गाय के मालिक से कहा हमें पांच गाय चाहिए आप कितना दाम लगा सकते है। इस पर उस व्यक्ति ने बोला यदि आप पांच गाय लेंगे तो में 4000 रूपए में आपको पांच गाय दे दूंगा। इस बात पर मुखिया ने सहमत होते हुए कल आने को बोला।

गांव जाकर पहले उनने गाय के लिए एक गौशाला बनायीं। उसके बाद गांव में ये ऐलान कर दिया की कल सभी गांव वालो को मुखिया के पास एकत्रित होना है। अगले दिन गांव के जमाकोश में से 4000 ले जाकर मुखिया 5 गाय खरीद लाया और उनने उसका दूध निकाला और उसकी मिठाई बनायीं।

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जब लोग जमा हो गए तो सबसे पहले मुखिया ने सब गांव वालों में पहले मिठाई बटवायीं। उसके बाद हरीश से पूछा तुम्हारे पास कितनी गाय है उसने कहा तीन गाय। मुखिया ने बोला तुम दुकानों में कितना दूध देते हो। हरीश ने बताया 40 किलो।

मुखिया ने कहा यदि तुम्हारी 3 गाय कुल 90 किलो दूध भी देती है तो उसमे से तुम 40 किलो दूकान में बेच देते हो उसके बाद तुम्हारे पास 50 किलो दूध बच जाता है लेकिन हमारे गांव में 100 दूध की खपत को तुम कैसे पूरा करते हो।

तब यह पता चल गया की हरीश दूध में आधा पानी मिलाता है। इसके बाद हरीश गांव के गुस्से से बचने के लिए वहाँ से भाग गया। जिसके बाद एक व्यक्ति ने पूछा अब गांव में दूध कौन देगा। तब मुखिया ने बताया वह गांव के जमाकोश से गांव के लिए 5 गाय लेकर आये है।

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जो की कुल 150 किलो दूध देंगी। जिससे 100 किलो गांव के लोगों को और 50 किलो दुकानों में दिया जायेगा। इससे गांव के ही 2 लोगों को रोज़गार भी दिया जायेगा और अब से दूध 10 रूपए  किलो मिलेगा। यह सुनकर सभी गांव वाले ख़ुश हो गए और मुखिया की समझदारी को सरहाने लगे।