Rahim Ke Dohe Class 7

Rahim Ke Dohe Class 7 | रहीम के अनमोल दोहे

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Rahim Ke Dohe Class 7 | रहीम के दोहे Class 7

Rahim Ke Dohe Class 7: दोस्तों आज हम इस लेख में अकबर के दरबार के महान कवि रहीम के दोहे के बारे में आपको बताने वाले है। रहीम का पूरा नाम अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ानाँ था। रहीम का जन्म 17 दिसम्बर 1556 को हुआ। इनके पिता का नाम बैरम खान था। जो की अकबर के गुरु और अभिभावक थे।

जब रहीम पांच साल के थे तब इनके पिता की हत्या कर दी गयी। इसके बाद इनका पालन पोषण अकबर ने ही किया। रहीम को अपनी विद्वता और काव्य प्रतिभा के कारण अकबर के दरबार में नौ रत्न में शामिल थे। रहीम की पत्नी का नाम मह बानू बेगम था। इनकी 10 संतान हुई। रहीम की मृत्यु 1 अक्टूबर 1627 को आगरा में हुई। आप इन रहीम के दोहों का प्रयोग class 7 के साथ class 9 और class 6 के लिए भी प्रयोग कर सकते है।

रहीम ने बहुत सी अद्भुत दोहों की रचना की उनमे से कुछ इस प्रकार है।

रहीम के दोहे | Rahim Ke Dohe

1.  रहिमन निज संपति बिन, कौ न बिपति सहाय।

बिनु पानी ज्यों जलज को, नहिं रवि सके बचाय॥

व्याख्या : इस दोहे में कबीर कहते है की मुश्किल समय में केवल निजी सम्पत्ति है जो काम आती है। जिस प्रकार पानी के अभाव में सूर्य भी कमल को सूखने से नहीं बचा सकता। उसी प्रकार जिस व्यक्ति के पास खुद की धन सम्पति नहीं है उसको बुरे समय में कोई नहीं बचा सकता। इसलिए मुश्किल वक्त के लिए हमें धन सम्पति बचा कर रखनी चाहिए।

2.  रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून।

पानी गये न ऊबरे, मोती, मानुष, चून॥

व्याख्या : इस दोहे में रहीम ने पानी की महत्ता पर प्रकाश डाला है। रहीम जी कहते है की हमें पानी को बचा कर रखना चाहिए क्योकि पानी अमूल्य है। बिना पानी के कुछ नहीं है। जिस तरह यदि पानी न हो तो व्यक्ति आटे की रोटी भी नहीं बना सकता। बिना पानी अर्थात चमक के मोती की भी कोई कीमत नहीं है। उसी प्रकार व्यक्ति को भी पानी अर्थात अपने अंदर विनम्रता को हमेशा जीवित रखना चाहिए। यदि व्यक्ति में विनम्रता ही नहीं होगी तो वह व्यक्ति जीवित होते हुए भी मृत के समान है।

3.  धनि रहीम जल पंक को लघु जिय पिअत अघाय ।

उदधि बड़ाई कौन हे, जगत पिआसो जाय॥

व्याख्या : इस दोहे में रहीम कहते है की थोड़ा सा कीचड़ का जल भी बहुत से छोटे जीव की प्यास बुझाने के काम आता है लेकिन समुन्दर में इतना विशाल पानी होने के बावजूद खारा होने के कारण किसी की प्यास नहीं बुझाता। उसी प्रकार बड़ा बनने से अच्छा है छोटा बनना जो किसी के काम आ सके। कवि इसमें हमें भी किसी व्यक्ति के काम में आने और सहायता करने की सलाह देते है।

4. एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाय ।

रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अघाय॥

व्याख्या : इस दोहे में रहीम जी कहते है की हमें एक समय में एक ही कार्य करना चाहिए। जिससे उस काम को हम सही ढंग से कर पाएंगे और उस काम में सफलता मिलेगी। यदि हम बहुत से काम एक साथ करेंगे तो हमारा कोई भी काम पूरा नहीं हो पाएगा। जिस प्रकार केवल पौधे की जड़ में पानी देने से यह पुरे पौधे फल और फूल तक पानी पहुँचाता है।

5. रहिमन अंसुवा नयन ढरि, जिय दुःख प्रगट करेइ,

जाहि निकारौ गेह ते, कस न भेद कहि देइ.

व्याख्या : इस दोहे में रहीम जी कहते है की जिस प्रकार आँखों से बहने वाले आँसू मन का दुःख व्यक्त कर देते है। उसी प्रकार घर से निकाला गया व्यक्ति भी अपने घर का भेद दूसरों को व्यक्त कर देता है।

6.  बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर

 पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर। ।

व्याख्या : इस दोहे में रहीम जी कहते है की ऐसे बड़ा होने का भी कोई अर्थ नहीं है जो दूसरे के काम न आ सके। जिस प्रकार खजूर का पेड़ बहुत बड़ा और ऊंचा होता है। लेकिन वह किसी भी गुजरने वाले राहगीर को न तो छाया देने के काम आता है और न की कोई उसके फल का आनंद ले सकता क्योंकि उसके फल भी बहुत दूर लगते है। इससे अच्छा छोटा होने में और दूसरे के काम आने में है।

7. मांगे मुकरि न को गयो केहि न त्यागियो साथ

मांगत आगे सुख लहयो ते रहीम रघुनाथ। ।

व्याख्या : इस दोहे में रहीम जी कहते है की आजकल के संसार में कोई भी व्यक्ति दूसरे से कुछ मांग ले तो दूसरा व्यक्ति मुकर जाता है। कोई भी दूसरे की सहायता करने में प्रसन्न नहीं होता। ऐसे में केवल भगवान राम ही है जो मांगने वाले व्यक्ति से भी खुश होते है और उसकी मदद करते है।

8. “रहिमन’ वहां न जाइये, जहां कपट को हेत | हम तो ढारत ढेकुली, सींचत अपनो खेत |”

व्याख्या: इस दोहे में रहीम जी समझाते है की हमें ऐसी जगह बिल्कुल भी नहीं जाना चाहिए जहाँ पर छल कपट होता हो या कपटी लोग रहते हो। ऐसे लोग उसी प्रकार दूसरे की मेहनत से फायदा उठाते है जिस प्रकार हमारे द्वारा मेहनत से कुँए से खींचे गए पानी से कोई दूसरा अपना खेत सींच ले।

9. “रहीम विद्या बुद्धि नहिं , नहीं धरम जस दान।

भू पर जनम वृथा धरै , पसु बिन पूंछ – विषान।।”

व्याख्या : इस दोहे में रहीम जी कहते है की जिस व्यक्ति के पास विद्या नहीं है,  जिस व्यक्ति के पास बुद्धि नहीं है और जो व्यक्ति धर्म का ज्ञान भी नहीं रखता वह व्यक्ति उसी पशु के समान है जिसके पास पुंछ नहीं है अर्थात वह व्यक्ति इस संसार में  बोझ के समान है।

10. बिगरी बात बनै नहीं, लाख करौ किन कोय।

रहिमन फाटे दूध को, मथे न माखन होय॥

व्याख्या : इस दोहे में रहीम जी समझाते है की व्यक्ति को बहुत सोच समझ कर बात करनी चाहिए। क्योंकि एक बार यदि बात बिगड़ जाये तो उसको ठीक करना बहुत मुश्किल होता है। जिस प्रकार यदि एक बार दूध फट जाये तो हमारी कितनी ही कोशिश करने के बावजूद उसको मथ कर उसमे से मक्ख़न नहीं निकाला जा सकता।

11.  चाह गई चिंता मिटी, मनुआ बेपरवाह।

जिनको कछु नहि चाहिये, वे साहन के साह॥

व्याख्या : इस दोहे में रहीम जी कहते है की इच्छा ही सब दुखों का कारण है। जिस व्यक्ति के मन में कोई भी इच्छा या चिंता नहीं है वह व्यक्ति बहुत सुखी है और वह व्यक्ति राजाओं के राजा के समान है।

12. “निज कर क्रिया रहीम कहि, सुधि भावी के हाथ।

पांसे अपने हाथ में, दांव न अपने हाथ।।”

व्याख्या : इस दोहे में रहीम जी कहते है की व्यक्ति के हाथ में केवल कर्म करना है उसका फल देना ईश्वर के हाथ में है। जिस प्रकार हमारे हाथ में जब पांसे होते है हम केवल उसको फेंक सकते है लेकिन उस पांसे से क्या निर्णय आएगा उसको हम निर्धारित नहीं कर सकते।

दोस्तों हम उम्मीद करते है की हमारे द्वारा ऊपर बताये गए रहीम के दोहे class 7 आपको पसंद आये होंगे। आप इसके बारे में अपने सुझाव हमें कमेंट में दे सकते है। 

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