Most powerful yoga in vedic astrology | Divorce yoga in kundali

Most powerful yoga in vedic astrology  Divorce yoga in kundali
Most powerful yoga in vedic astrology Divorce yoga in kundali

Most powerful yoga in vedic astrology

गजकेशरी योग:

जैसा की नाम से सी प्रतीत हो रहा है यह इस प्रकार का योग है जिस प्रकार हाथी के ऊपर सिंह की स्वारी हो। ज्योतिष में गजकेशरी योग की बहुत चर्चा होती है क्योंकि यह योग है ही इतना शानदार। यह योग चंद्र और गुरु से बनता है।

यह योग श्रीराम की जन्म कुंडली में भी था। यह गुरु को चंद्र के संयोग से बनता है। जब गुरु और चंद्र एक ही राशि में बैठे हो या फिर एक दूसरे के आमने सामने बैठकर सातवीं दृष्टि से देख रहे हो। यह योग ज़्यादा अच्छा काम जब करता है जब ये योग केंद्र के घरों में बने। इसके साथ जब लग्न का मालिक गुरु और चंद्र का मित्र हो या फिर यही दोनों ग्रहों में से कोई हो तो इस योग के लाभ में और वृद्धि हो जाती है।

लेकिन यदि यह योग जब बने तब लग्न का मालिक शत्रु ग्रह हो तो यह उतना प्रभावी नहीं होता। इसके साथ जब यह योग त्रिक भाव यानि की 6, 8, 12 भावों में बने तो यह कारगर नहीं होता। इस योग बनने पर जातक अपने जीवन में बहुत तरक्की करता है। उसके पास बहुत धन होता है। वह एक सफल इंसान के रूप में समाज में जाना जाता है।

लक्ष्मी योग:

यह योग भी ज्योतिष विज्ञान में बहुत प्रसिद्ध है। यह लक्ष्मी योग चंद्र मंगल योग से भी जाना जाता है क्योंकि यह इन्हीं दो ग्रहों के संयोग के कारण बनता है।

यदि यह योग भी और योग की तरह यदि केंद्र के भावों में बने तो अच्छा है और यदि त्रिक भाव में बने तो उतना कारगर नहीं होता। इस योग में चंद्र यानि मन को मंगल की ताकत प्राप्त होती है। जिससे वह अपने लक्ष्यों को हासिल करने की ताकत रखता है।

यह योग व्यक्ति को बहुत धन देती है है क्योकि यह लक्ष्मी योग है। इस योग वाले व्यक्ति पर लक्ष्मी बहुत मेहरबान रहती है। लेकिन यह योग वाला व्यक्ति थोड़ा गुस्सैल सवभाव का होता है उसे गुस्सा जल्दी आ जाता है। लेकिन यदि वह अपने मन की ताकत को सही जगह लगाए तो ऊंचे लक्ष्यों को प्राप्त करने के काबिल होता है।

विपरीत राज योग:

यह योग दूसरे योगों से अलग 6 , 8  और केवल 12 भाव में ही बनता है। इस योग में इन्हीं घरों के मालिक शामिल होते है। यह योग तब बनता है जब इन भावों के मालिक इन्हीं घरों में बैठे होते है। जिस प्रकार यदि छठे घर का मालिक आठवें घर में या आठवें घर का मालिक बारहवें घर में बैठा हो या कोई भी आपस में इन तीन घरों में कहीं भी बैठा हो तो यह योग बनता है।

जैसा की नाम से ही जान सकते है यह योग विपरीत परिस्थितियों में बनता है। जब व्यक्ति के जीवन में बहुत परेशानी आती है और उसको कोई आशा नज़र नहीं आती ऐसी परिस्थिति में यह योग काम करता है और उसको ऐसा कोई सहारा मिलता है

जिससे वह जीवन की मुश्किल परिस्थितियों से लड़ता हुआ बहुत सफ़ल इंसान बन जाता है और जीवन में बहुत तरक्की करता है।  

शनि और सूर्य युति का परिणाम:

शनि और सूर्य की युति या प्रतियुति अच्छी नहीं मानी जाती। जब सूर्य और शनि एक ही भाव में साथ बैठे हो या फिर एक दूसरे के आमने सामने बैठे हो तो यह घटित होता है। वैसे देखा जाए तो शनि सूर्य देव के पुत्र है लेकिन इनकी आपस में गहरी शत्रुता है।

सूर्य जहाँ पर सरकार या मालिक का प्रतिनिधित्व करता है वही शनि नौकर और अधीनस्थ काम करने वालों का प्रतीक है। यह दोनों एक दूसरे से अलग है। इनके साथ में होने पर सरकार से या पिता से न बनना या कोई मनमुटाव होना।

अक्सर यह देखा गया है जब इनकी युति होती है तो पिता या पुत्र में से एक की कुंडली काम करती है मतलब यदि पिता अच्छा नाम कमा रहे है तो पुत्र को कोई सफलता नहीं मिलती और वो सफलता के लिए संघर्ष कर रहा होगा और पुत्र अच्छा कर रहा होगा तो पिता की स्थिति सही नहीं होगी।

इसको दूर करने के लिए पिता या पुत्र को साथ में एक ही जगह पर नहीं रहना चाहिए। जिससे इस योग के दुष्परिणाम को दूर किया जा सकता है।

धन योग:

किसी व्यक्ति को ज्योतिष में ज्यादा रूचि हो या न हो लेकिन अपनी कुंडली में बनने वाले धन योगों को वह जरूर जानना चाहता है की वह जीवन में कितना धन कमायेगा। वह अपने जीवन में सफलता प्राप्त करेगा या नहीं।

आप अपनी कुंडली में बहुत से योगों से इसके बारे में जान सकते है जिसकी चर्चा हम यहाँ पर करेंगे। जितने ज्यादा योग आपकी कुंडली में होंगे आपके पास उतना ही ज्यादा धन होगा। यदि आपकी कुंडली में चंद्र मंगल  लक्ष्मी योग है तो यह धन दायक योग है।

यदि आपकी कुंडली में गजकेसरी योग है तो यह भी आपको बहुत सा धन दिला सकता है। यदि आपका लग्नेश दूसरे धन भाव में जाये या लग्नेश या धनेश आपस में स्थान परिवर्तन करके बैठे हो तो यह धन के लिए बहुत अच्छा है।

यदि आपका धनेश यानि दूसरे भाव का मालिक लाभ स्थान यानि की ग्यारवें स्थान में  बैठा और और लाभेश यानि ग्यारवें स्थान का मालिक दूसरे स्थान में स्थान परिवर्तन करके बैठे हो तो यह बहुत बड़ा धन योग होता है।

लग्नेश और लाभेश का आपस में स्थान परिवर्तन या साथ बैठना भी बहुत धनदायक होता है। यदि केंद्र के घरों में लग्नेश , धनेश और लाभेश एक साथ बैठे हो तो यह बहुत धन अर्जन का सूचक होता है। इन सबके साथ आप अपनी कुंडली में शुक्र की स्थिति को भी देख सकते है जो की धन और ऐशो आराम की जिंदगी के लिए जाना जाता है।

सूर्य का पहले भाव में प्रभाव:

सूर्य यदि कुंडली के पहले भाव यानि की लग्न में स्थित होता है तो ऐसा जातक सूर्य के गुणों से प्रभावित होता है लेकिन इसके साथ आपको राशि के बारे में भी देख लेना जरुरी है की वह किस राशि में बैठा है।

यदि सूर्य लग्न में 1 नम्बर की राशि यानि मेष में बैठा हो तो यह सूर्य की उच्च राशि है इसमें सूर्य बहुत अच्छे परिणाम देता है। ऐसा जातक एक बहुत अच्छे व्यक्तित्व का मालिक होगा उसमे सूर्य के समान तेज़ होगा। उसमे बहुत आत्मविश्वास होगा।

ऐसा व्यक्ति एक नेतृत्व करने वाला होगा। यदि किसी को जरुरत पड़ेगी तो वह मदद करने के लिए हमेशा आगे रहेगा। लेकिन पहले घर के सूर्य वाला व्यक्ति तो थोड़ा अहंकारी बना सकता है। ऐसा व्यक्ति किसी सरकारी सेवा में ऊंचे ओहदे पर पहुँचता है।

यदि सूर्य पहले भाव में नीच राशि यानि तुला में हो तो इसके बिलकुल विपरीत परिणाम मिलेंगे। ऐसे व्यक्ति का आत्मविश्वास बहुत कम होता है वह ज्यादा लोगों के सामने अपने आप को सही से प्रस्तुत नहीं कर पाता। ऐसे जातक के अपने पिता और सरकार से रिश्ते अच्छे नहीं रहते। सरकारी काम काज में उसको बाधा का सामना करना पड़ता है। 

धर्म भाव:

लग्न के 3 भाव को धर्म भाव कहा जाता है इनमे पहला , पांचवा और नौवां घर शामिल है। जहाँ पहला घर खुद जातक का प्रतीक होता है। पांचवा घर भी धर्म भाव में शामिल है यह एक त्रिकोण का निर्माण करता है। पाँचवे घर से रूचि को देखते है की आपकी किस चीज़ में रूचि है। नौवें घर से धर्म की और झुकाव , धार्मिक यात्राओं और गुरु का घर होता है।

विवाह टूटने के योग कुंडली में | Divorce yoga in kundali:

आजकल बहुत से लोग शादी शुदा जिंदगी में होती अनबन को लेकर परेशान रहते है इसके साथ ही उनके मन में यह सवाल भी होता है की उनकी शादी आगे चलेगी की नहीं कहीं उनकी कुंडली में शादी टूटने का योग तो नहीं बन रहा।

इसके लिए हम आपको कुछ ऐसे ही योग को बताएँगे जो आपको इसके बारे में जानकारी देंगे। यदि आपकी कुंडली के सातवें घर में कोई क्रूर ग्रह आकर बैठा हो जिस प्रकार यदि आपके सातवें घर जिसको जीवनसाथी का घर भी कहते है उसमे राहु , केतु , सूर्य या शनि जैसा ग्रह हो तो यह आपकी शादी को कमजोर करता है। यह क्रूर ग्रह शादी को तोड़ने का प्रयास करते है।

यदि ये सब ग्रह आपके सातवें घर में न बैठे हो लेकिन इनकी दृष्टि इस भाव पर पड़ रही हो तो यह भी सही नहीं है। विवाह के चलने के लिए सातवें घर का मालिक भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि इस घर का मालिक 6 , 8 और 12 भावों में जाता है तो यह भी शादी शुदा जिंदगी के लिए सही नहीं है।

विवाह टूटने के योग कुंडली में | Divorce yoga in kundali:

सातवें घर के मालिक के साथ राहु , केतु या शनि जैसे ग्रह होना भी इसको दर्शाता है। इसके साथ साथ आप अपने सातवें घर के मालिक की स्थिति को नवमांश में भी देख सकते है यदि यह नवमांश में ठीक स्थिति में है तो शुरू में कुछ दिक्कत आने के बाद बाद में सब सही हो जायेगा।

लेकिन नवमांश में भी इसकी स्थिति अच्छी नहीं है तो यह शादी को टूटने के संकेत करता है। ऐसे स्थिति में आपको हमेशा कुंडली का मिलान करके ही शादी करनी चाहिए।

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यदि आपकी कुंडली के सातवें घर में राहु जैसा ग्रह है तो आपके जीवन साथी की कुंडली में उसका काट यानि की शुक्र जैसा ग्रह या गुरु जैसा ग्रह होना चाहिए जो राहु को कण्ट्रोल कर सके।

इसके साथ आपके जीवन साथी की कुंडली में सातवें घर के मालिक की स्थिति लग्न कुंडली और नवमांश दोनों में अच्छी होनी चाहिए यदि आपकी कुंडली में इसकी स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है तो।

इसके अलावा आप अपने सातवें घर के मालिक ग्रह की नियमित पूजा और उपाय कर सकते है जिससे आपका शादी का ग्रह मजबूत हो और आपके रिश्ते को मजबूती प्रदान करे।