Gautam Buddha Story in Hindi | गौतम बुद्ध की कहानी

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Gautam Buddha Story in Hindi

Buddha Story in Hindi: दोस्तों आज हम आपको गौतम बुद्ध के जीवन की कहानी बताने वाले हैं। भगवान गौतम बुद्ध को मानने वाले और उनके धर्म का आचरण करने वाले करोड़ों लोग पूरी दुनिया में है। बौद्ध धर्म को मानने वाले लोगों को Buddhist कहा जाता है। बौद्ध धर्म के अनुयायी ज्यादातर म्यांमार, कंबोडिया, थाईलैंड, नेपाल, चीन, मलेशिया, भूटान आदि देशो में है।

गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व नेपाल में लुंबिनी नामक स्थान पर हुआ था। गौतम बुद्ध के पिता एक राजा थे। जिनका नाम शुद्धोधन और माता का नाम महामाया था। पहले के समय में यह रिवाज था कि बच्चे के जन्म के समय माता अपने मायके चली जाती थी। जब गौतम बुद्ध का जन्म होने वाला था तो महामाया अपने मायके कपिलवस्तु के लिए जा रही थी तो रास्ते में उन्हें प्रसव पीड़ा होने लगी।

जिससे उन्होंने रास्ते में एक पेड़ के नीचे ही गौतम बुद्ध को जन्म दिया। गौतम बुद्ध के जन्म के 7 दिनों के बाद ही गौतम बुद्ध की माता की मृत्यु हो गई। इसके बाद गौतम बुद्ध को राजा शुद्धोधन के पास लाया गया। राजा शुद्धोधन ने बहुत से ब्राह्मणों को गौतम बुध के नामकरण के लिए बुलाया।

उन्होंने गौतम बुद्ध का बचपन का नाम सिद्धार्थ गौतम रखा। ब्राह्मणों ने गौतम बुध के बारे में भविष्यवाणी की की गौतम बुद्ध बड़े होकर या तो एक महान राजा बनेंगे या फिर एक महान साधु बनेंगे। राजा शुद्धोधन गौतम बुद्ध को एक महान राजा बनाना चाहते थे इसलिए उन्होंने गौतम बुद्ध को बचपन से ही हर प्रकार की धार्मिक गतिविधि से दूर रखा।

गौतम बुद्ध का पालन पोषण बचपन में उनकी मौसी ने किया। राजा शुद्धोधन गौतम बुद्ध को महल से बाहर भी नहीं जाने देते थे। उन्होंने बुद्ध की शिक्षा की व्यवस्था महल के अंदर ही कर रखी थी। लेकिन गौतम बुद्ध बचपन से ही बहुत ही दयालु स्वभाव के थे। वह किसी का दुःख नहीं देख सकते था।

एक बार उनके चचेरे भाई देवदत्त ने एक हंस को तीर मारा। जिसका उपचार गौतम बुद्ध ने किया। गौतम बुद्ध का विवाह 16 वर्ष की आयु में राजकुमारी यशोधरा से कर दिया गया।

जब गौतम बुद्ध बड़े हुए और अपने महल से बाहर कदम रखा तो उन्होंने संसार में बीमारी, सांसारिक दुख और बुढ़ापे को देखा। वह इन सब प्रश्नों के उत्तर को खोजना चाहते थे। इसी खोज के लिए उन्होंने एक रात को अपने पिता के महल को त्याग दिया।

उन्होंने एक नदी में स्नान किया और अपने बाल कटा कर साधु के भेष में आ गए। इसके बाद वह भिक्षा मांगने लगे। वह भिक्षा मांगते हुए मगध नरेश बिंबसार के पास पहुंचे। उन्होंने गौतम बुद्ध को पहचान लिया और गौतम बुद्ध को अपने राज्य में कुछ जमीन देने की पेशकश की लेकिन गौतम बुद्ध ने उसे ठुकरा दिया।

गौतम बुद्ध इसके बाद वहां से चल पड़े। बुद्ध ने बाद में योग और ध्यान की शिक्षा ली। जिसका अभ्यास वह करते रहे। कुछ सालों के बाद वह बोधगया पहुंचे। बोधगया में उन्होंने 49 दिनों तक एक पीपल के पेड़ के नीचे ध्यान लगाया। जिसके बाद उन्हें दिव्य ज्ञान की प्राप्ति हुई।

उस समय गौतम बुद्ध की आयु 35 वर्ष थी। जिसके बाद उन्होंने 80 वर्ष की आयु तक घूम घूम कर अपने संदेश लोगों तक पहुंचाएं और लोगों की मदद की। गौतम बुद्ध की मृत्यु कुशीनगर में हुई। उनकी मृत्यु के पश्चात आज भी उनके सन्देश बौद्ध धर्म के रूप में जाने जाते है।

Final words:

हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारे द्वारा ऊपर दी गई जानकारी Gautam Buddha Story in Hindi पसंद आई होगी। आप इस post को अपने दोस्तों या रिश्तेदारों के साथ शेयर कर सकते हैं। जिससे वह इस बौद्ध धर्म को शुरू करने वाले भगवान गौतम बुद्ध के जीवन की कहानी के बारे में जान सके।

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