moral stories in hindi short

आलसी बेटा | Moral stories in hindi short

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Moral stories in hindi short

एक गांव में तुलाराम नाम का एक साहूकार था। वह बहुत मेहनती था। वह सुबह 5 बजे उठ कर सबसे पहले शिव मंदिर जाता इसके बाद वह अपने खेतों में, गोदाम में जाता और फिर अपने भैसों के तबेले में जाता था।

उसकी मेहनत के कारण उनका काम अच्छा चल रहा था जिससे वह और ज्यादा अमीर हो गए थे। एक दिन तुलाराम अपने बेटे रामू को सुबह जल्दी उठाने के लिए गया जिससे वह भी उसके साथ काम पर जाएं और काम को सीख जाए।

लेकिन वह आलस्य के कारण नहीं उठा जिसके बाद तुलाराम चला गया। तुलाराम इसी तरह उसको जब भी रामू को उठाने के लिए जाता था तब वह कुछ न कुछ बहाना बना कर फिर से सो जाता था।

तुलाराम अपना काम मेहनत से उसी तरह करता जा रहा था। एक दिन तुलाराम बीमार पड़ गया। वह कुछ दिनों तक बहुत बीमार रहा जिसके बाद उसकी मृत्यु हो गयी। तुलाराम के मरने के बाद भी उसका बेटा पहले की ही तरह लेट तक सोता था।

उसकी इस आदत के कारण धीरे धीरे व्यापार में घाटा होने लगा और जो तुलाराम ने कमाया था वह सब चला गया। यह सब देख कर तुलाराम की बीवी ने रामू को बुलाया और कहा की हमारे व्यापार में बहुत घाटा हो रहा है।

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इसको सही करने के लिए तुम कुछ करो। रामू अपनी माँ से बोला मुझे व्यापार नहीं आता इसमें मै क्या कर सकता हूँ। रामू की माँ बोली दूसरे गांव में तुम्हारे नाना रहते है। तुम उनके पास जाओ और उनसे कुछ व्यापार की बाते सीखो।

रामू ने ऐसा ही किया वह अगले दिन दूसरे गांव अपने नाना से मिलने के लिए गया। उसने नाना से व्यापार में घाटे की बात बताई। उनने रामू को सुबह 5 बजे उठकर पहले शिव मंदिर, फिर खेतों, गोदाम में और उसके बाद भैसों के तबेले में जाने की सलाह दी।

रामू अपने नाना की सलाह के अनुसार सुबह 5 बजे उठकर सब जगह जाने लगा। उसके कुछ दिन ऐसा करने पर उनके व्यापार में काम करने वाले सभी व्यक्ति सोचने लगे की मालिक अब रोज़ आते है। जिससे उनने घोटाला करना बंद कर दिया।

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इससे उनका व्यापार फिर से अच्छा चलने लगा और पहले की ही तरह हो गया। यह देखकर रामू की माँ बहुत खुश हुई और उसने रामू को अपने नाना को धन्यवाद बोलने को भेजा। जिनकी वजह से यह सब हुआ था।

रामू अपने नाना को धन्यवाद बोलने के लिए उनके घर गया। उसके नाना ने रामू को बोला तुम पहले आलस करते था जिससे  व्यापार में घाटा हुआ था। अब तुमने आलस करना बंद कर दिया जिससे तुम्हारा व्यापार फिर से चलने लगा। अब रामू को यह बात समझ आ चुकी थी।

Moral of the story

सीख : हमें कभी भी आलस नहीं करना चाहिए। आलस करने से नुक्सान होता है जिस तरह रामू को पहले इससे नुक्सान उठाना पड़ा।