Jaise Ko Taisa Story in Hindi | जैसे को तैसा हिंदी कहानी

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Jaise Ko Taisa Story in Hindi

Jaise Ko Taisa Story in Hindi: एक बार की बात है सुंदरवन में एक ऊंट और एक सियार की दोस्ती थी। सियार अपने आप को बहुत चालाक समझता था। एक दिन की बात है सियार ऊंट से बोला कि मुझे आज खरबूजे खाने का बहुत मन कर रहा है आओ पास में ही एक खरबूजे का खेत है। उसमें जाकर दोनों खरबूजे खाते हैं।

ऊंट सियार की बात मान गया और दोनों खरबूजे के खेत में जाकर खरबूजे खाने लगे। सियार ने तो जल्दी-जल्दी खरबूजे खाकर अपना पेट भर लिया लेकिन अभी ऊंट का पेट नहीं भरा था और वह खरबूजे खा ही रहा था।

सियार खेत के पास एक पेड़ के नीचे जाकर उआ उआ करने लगा। जब उसने पूछा कि तुम ऐसा क्यों कर रहे हो यदि खेत के मालिक ने सुन लिया तो वह खेत में आ जाएगा। सियार ने कहा कि जब मैं खाना खा लेता हूं तो उसके बाद में ऐसा ही करता हूं और सियार फिर से उआ उआ करने लगा।

यह सुनकर खेत का मालिक वहां पर आ गया। खेत के मालिक को देखकर सियार पहले ही भाग गया। खेत के मालिक ने उसके बाद डंडे से पिटाई करी। जिसके बाद ऊंट भी वहाँ से भाग गया। कुछ देर के बाद ऊंट जंगल में पहुंचा जहां पर सियार था।

ऊंट को गुस्सा तो बहुत आ रहा था लेकिन उसने सियार से कुछ नहीं बोला। कुछ दिनों के बाद ऊंट ने सियार से कहां की आज मेरा नदी में नहाने का बहुत मन कर रहा है चलो नदी में नहाने चलते है। इस पर सियार ने ऊंट से कहा कि लेकिन मुझे तो तैरना नहीं आता।

ऊंट ने सियार से कहा कि तुम मेरी पीठ पर बैठ जाना। इस बात पर ऊंट सहमत हो गया। इसके बाद दोनों नदी की ओर चल पड़े। नदी पर जाकर ऊंट सियार की पीठ पर बैठ गया।

ऊंट नदी के बीच में जाकर डुबकी लगाने लगा। ऊंट को डुबकी लगाता हुआ देखकर सियार ने उससे कहा कि यह तुम क्या कर रहे हो ऐसे तो मै डूब जाऊंगा।

तब ऊंट ने कहा कि जब भी मैं पानी को देखता हूं तो मेरा पानी में डुबकी लगाने का मन करता है। उठ के बार बार डुबकी लगाने से सियार की जान पर बन आई और वह डूबते डूबते बचा। ऊंट के नदी से बाहर आने पर उसने राहत की साँस ली।

सियार को समझ आ चुका था कि यह सब ऊंट ने उस दिन का बदला लिया है और उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। जिसके बाद सियार ने ऊंट से पहले की माफ़ी माँगी।

Moral: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें कभी भी दूसरे के साथ गलत व्यवहार नहीं करना चाहिए नहीं तो उसका परिणाम हमें भुगतना पड़ता है।

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