Manglik dosh in kundali | Weak moon in astrology and its remedies

Manglik dosh in kundali  Weak moon in astrology and its remedies
Manglik dosh in kundali Weak moon in astrology and its remedies

Manglik dosh in kundali | Weak moon in astrology and its remedies: इस लेख में आप मांगलिक दोष क्या होता है आपको शादी करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। इसके पाप, शुभ कतरी योग और कमजोर चंद्र के कुंडली में लक्षण और उसको ठीक करने के उपायों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

Manglik dosh in kundali:

जब मंगल की स्थिति कुंडली में किसी ख़ास भाव में होती है तो इस स्थिति को मांगलिक कहा जाता है। इसका विशेष महत्त्व शादी के समय होता है जब लड़के लड़की की कुंडली का मिलान किया जाता है। बहुत लोग मंगली होना बहुत अशुभ मानते है लेकिन ऐसा नहीं है कुंडली में यदि मंगल 5 स्थान पर जैसे यदि पहले भाव में, चौथे भाव में , सातवे भाव में , आठवें भाव में और बारहवें भाव में हो तो इसको मंगली स्थिति कहा जाता है।

मंगली व्यक्तियों को केवल मंगली के साथ ही शादी करने की सलाह दी जाती है। यदि लड़का मंगली है तो लड़की को भी मंगली ही होना चाहिए। इसका किसी अशुभता से कोई सम्बन्ध नहीं है मंगल यदि कुंडली के बारह भाव में से पांच स्थान में मंगली बनाता है तो बहुत लोग मंगली होते है। इन सब स्थितियों में यह शादी के घर को या तो देखता है या फिर असर करता है और ऐसे व्यक्ति थोड़े उग्र सवभाव के होते है

जिसके कारण यदि इनका जीवन साथी भी इनके जैसा नहीं होगा तो मंगली व्यक्ति उन पर भारी पड़ जायेंगे जिससे उनका वैवाहिक जीवन खतरे में पड़ सकता है इसके लिए उनको मंगली जीवन साथी के साथ शादी करनी चाहिए जिससे वह इस प्रभाव को नियंत्रित कर सके।

मंगल यदि पहले भाव में होता है तो यह अपनी सातवीं दृष्टि से सातवें भाव को देखता है जो की शादी का होता है और व्यक्ति को मंगली बनाता है। यदि मंगल कुंडली में चौथे भाव में बैठा हो तो यह अपनी चौथी दृष्टि से सातवें भाव को देखता है। यदि मंगल सातवें घर में बैठा होता है तो यह शादी का खुद का घर होता है। यदि मंगल आठवें घर में बैठा हो तो यह जीवनसाथी के मृत्यु भाव को सातवीं दृष्टि से देखता है जो की अच्छा नहीं है। इसके अलावा यदि मंगल बारहवें भाव में हो तो यह अपनी आठवीं दृष्टि से सातवें घर को देखता है।   

पाप कतरी योग और शुभ कतरी योग | Pap Katri yog and Subh katri yog:

जब किसी ग्रह के सापेक्ष में पाप या शुभ कतरी योग को देखना हो तो आपको उस ग्रह के भाव से दूसरे और बारहवें भाव को देखना होगा यदि दूसरे और बारहवें भाव में पाप ग्रह जैसे की राहु , केतु या शनि जैसे ग्रह बैठे हो दोनों तरफ तो यह पाप कतरी योग कहलाता है। जबकि यदि उस ग्रह के दोनों तरफ शुभ ग्रह जैसे की बुध , शुक्र, गुरु या चंद्र जैसे ग्रह हो तो यह शुभ कतरी योग बनाता है। पाप कतरी योग से वह ग्रह पीड़ित हो जाता है और शुभ ग्रह भी ज्यादा अच्छे परिणाम नहीं दे पाता। यदि ग्रह शुभ कतरी योग में है व्यक्ति को बहुत से ऐसे अच्छे लोगों का साथ मिलेगा जिनकी वजह से वह बहुत उन्नति करेगा।

ग्रहों का दिशा बल | Graho ka disha bal:

हर ग्रह का अपना एक दिशा बल होता है जहाँ होने पर वह ग्रह बहुत अच्छे परिणाम देता है। बुध और गुरु को पहले भाव में होने पर दिशा बल मिलता है। शुक्र और चंद्र को चौथे स्थान में होने पर दिशा बल मिलता है। शनि ग्रह को सातवें स्थान में होने पर दिशा बल मिलता है। जबकि सूर्य और मंगल को दसवें भाव में होने पर दिशा बल मिलता है। इन भाव में जाकर ग्रह बलि हो जाते है और अपने पुरे बल के साथ व्यक्ति के जीवन में अच्छाई की तरफ काम करते है जिस तरह यदि दसवां घर कर्म का होता है ऐसे में सूर्य और मंगल जैसे ग्रह इस घर में आकर अपना एक नाम और कर्म में पराक्रम को दर्शाते है और गुरु और बुध का सम्बन्ध बुद्धि और ज्ञान से होता है ऐसे में ये दोनों ग्रह लग्न में आकर व्यक्ति की बुद्धि को तेज और ज्ञानवान बनाते है।

Weak moon in astrology and its remedies:

ज्योतिष में चंद्र माता, मन, भावनाएं और पानी को दर्शाता है। यदि व्यक्ति की कुंडली में चंद्र कमज़ोर हो तो व्यक्ति को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है क्योंकि इसका सीधा सम्बन्ध हमारे मन से है और शरीर में पानी से है। हमारा शरीर 70 % पानी का ही बना हुआ है। इसके अलावा यदि आपका चंद्र सही नहीं है तो यह आपके कुंडली में बनने वाले सभी राजयोगों को भी भंग कर देता है क्योंकि यदि आपका अपने मन पर ही नियंत्रण नहीं है तो आप जीवन में कुछ खास सफलता नहीं पा सकते।

अब यह जानेंगे जिसके द्वारा आप जानेंगे की आपकी कुंडली में चंद्र ख़राब है या नहीं। यदि आपकी कुंडली में चंद्र नीच का है और पाप पीड़ित है और 6 , 8 या 12 में बैठा है तो यह कमजोर चंद्र के लक्षण है। पाप पीड़ित का मतलब यदि चंद्र राहु , केतु या शनि के साथ सम्बन्ध बना रहा है यह चाहे युति या दृष्टि कैसे भी हो सकती है। इसके अलावा जिसको कुंडली देखनी नहीं आती वह कुछ लक्षणों के द्वारा पता लगा सकते है की उनकी कुंडली में चंद्र ख़राब स्थिति में है।

यदि चंद्र ख़राब हो तो व्यक्ति का अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रहता। कभी तो वह बहुत दुखी हो जाता है और बहुत रोने लगता है और कभी बहुत खुश हो जाता है। व्यक्ति का किसी भी काम में मन नहीं लगता वह किसी भी चीज़ को बहुत देर तक नहीं कर सकता उसका मन भटकने लग जाता है। यदि ऐसा व्यक्ति सोचकर बैठेगा की 1 घंटा पढ़ेगा लेकिन 5 मिनट बाद ही वह उठ जाता है।

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ऐसे व्यक्ति को बहुत जल्द पानी से सम्बन्धी बीमारियाँ हो सकती है जैसे डायरिया , कॉलरा, खून से सम्बन्धी बीमारियाँ और  डेंगू आदि। ऐसे व्यक्ति को मानसिक बीमारी जैसे की पक्षाघात आदि भी हो सकते है।

यदि आप इन सब बीमारियों से मुक्त और चंद्र को अच्छा करना चाहते है तो सबसे पहले दिन में किसी भी समय तीस मिनट कहीं अकेले में शांति से बैठ जाना है और अपने मन को एकाग्र करने लग जाना है वैसे ख़राब चंद्र वालो के लिए यह मुश्किल होता है लेकिन फिर भी आप पांच मिनट से शुरू करके इसको बढ़ा  सकते है। कुछ ही दिनों के अभ्यास से आप अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव महसूस कर सकते है।

आप इसके साथ सोमवार को शिवलिंग पर जिसमें सांप बने हो उस पर दूध चढ़ा सकते है और आप भगवान शिव की पूजा कर सकते है। आप अपने गले में चांदी की चेन धारण कर सकते है इसके साथ आप सोमवार को सफ़ेद वस्तुओं जैसे सफ़ेद कपडे, चीनी, चावल या मिठाई का दान कर सकते है। आपको चंद्र कमज़ोर होने पर दूध और दूध से बानी हुई वस्तुएँ का सेवन बढ़ा देना चाहिए।